हाई…शुरुआत अपने परिचय से करती हूँ. मेरा नाम खुशी है, माफ करना खुश्बू है, पर सभी मुझे प्यार से खुशी बुलाते है. इससे पहले आपने मुझे “हमारी आवाज सुनो” पर सुना हैं. मूलतः सुरत की हूँ. पर पिछ्ले दो सालो से अहमदाबाद मे हूँ, अपनी पढाई के लिए.
मैं ईंटीरियर डिजायनिंग का कोर्स कर रही हूँ.
यहाँ अभी नवरात्री की धूम है. सभी इन दिनो खुब मस्ती करते है. पर कुछ मेरे जैसे भी होते है जो बिना एंजोय किए थक हार के घर वापस आ जाते है. मैं बहूत कम बाहर जाती हूँ. पर कल अपने दोस्तो के जीद के वजह से नवरात्री देखने बाहर गई थी और सबसे पहले पहुँच गई. बाहर इतनी भीड देख कर लगा अन्दर जाना ज्यादा सही होगा. पर हुआ युँ की हम सब एक साथ न मिलने के वजह से मैदान मे एक दूसरे को करीब एक घंटे तक ढूढते रहे. हमारी पौने ग्यारह इसी मे बज गई. बाहर जितनी भीड थी उसे कही ज्यादा अन्दर थी. मैदान मे गरबा करने के लिए अलग से जगह बनाई होती है. हम सब उस जगह गए, पर हमे गरबे करने की जरुरत ही नही पडी, भीड हम से गरबे करवा रही थी. मैंने इतनी भीड कभी नही देखी थी. एक घंटे बाद वहाँ से बाहर आना सही लगा, जैसे-तैसे बाहर आए. खडे-खडे इतने थक गए थे लग रहा था जहाँ है वही बैठ जाए. गरबे की जगह से बाहर आए और बैठने के लिए जगह ढूढने लगे. करीब आधे घंटे तक. इतनी मेहनत के बाद मेरे दोस्तो को भूख लग गई थी, पर मेरी तो मर गयी थी. पर भीड को देख कर किसी का कुछ भी खाने का मन नहीं कर रहा था. घडी देखी तो एक बज रहे थे. करीब तीन घंटे से खडे थे, थक गये थे. अंत मे सभी के विचार एक ही थे घर लौट जाने का. थकावट से चूर, भूखे-प्यासे, बिना मस्ति किए घर लौट आए.
कल का दिन बहूत बूरा था. आज कही नही जाउँगी. घर बैठना शायद मेरे लिए ज्यादा अच्छा हो. टी.वी देख कर ऐंजोय करुगी.
khusiji hindi chittha jagat mein swagat hai aapka…….
agli pravishtiyon ka intzar rahega…
खुशी जी
हिन्दी चिट्ठा जगत में आपका एक और सुरत वासी स्वागत करता है(अभी हैदराबाद से), मैं भी मूलत राजस्थान का ही हुँ और आपके पंकज भाई ने मुझे भाईसा की उपाधि दी हुई है।
पहली ही पोस्ट इतनी अच्छी लिखी है मानो आप अनुभवी हों, और आपके चिट्ठे की डिजाईन बहुत सुन्दर लगी।
लिखती रहिये
बिलकुल मत जाना. घर में बैठकर टीवी ही देखना.. वो भी हमारा चैनल इंडिया टीवी. शायद मैं आपको नज़र आ जाउं..(ही ही)
वैसे खुशी जी आपका ब्लॉगजगत में स्वागत है. यूं ही लिखते रहिए.
स्वागत है हिन्दी चिठ्ठाकारों के परिवार मे.
आपके चिट्ठे के लिये शुभकामनायें| सचमुच यह खुशी की ही बात है….
स्वागत
आप का चिट्ठा पढना हमारे लिये खुशी की बात है लिखते रहीये